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Meri Pyari [MAA] | Maa | माँ के जीवन

''MAA''


मेरे प्यारे दोस्त, मेरे 100 पोस्ट पुरे होने के खुसी में में मेरे माँ के लिए कुछ लिखना चाहता हूं | माँ के जीवन में उसके बच्चे उसके लिए सब कुछ हैं | तो इसी बात में में आपको ले चलता हु माँ के पास | 

अगर में कहीं चलते चलते गिर पडू तो बो माँ हे जो अपने पास खिंच के बाहोंमें ले लेती हे | अगर में खाने के समय गाला में कुछ लग गया तो माँ के हृदय के स्पंदन बड़ जाती हे | माँ होती हे ऐसे | बच्चे के थोड़े से कुछ पैन होने से माँ के ह्रदय से ब्लड निगलने लगता हे | उसके लिए संतान उप्पेर जब जब कोई भी बिपदा अति हैं तो तब माँ के कलिजे हिल जाती हैं | बो दोनों हातों को फैलाके सभी अपने कलिजे में लगा लेता हे | कारण बच्चे उसके लिए जीवन हैं | 

चलिए माँ बारे में में ऐसी टॉपिक लाया हु जिसे पड़के अप्प आपके दिल थाम लेंगे | में कौशिक करता हु के आपको इस टॉपिक  पड़के कुछ माँ के लिए प्यार जरूर जागे  और माँ क्या करती हे बच्चे के लिए ?


१. प्रखर स्रोत से बचाने बाली माँ  दो संतान को :-

2017 , धुप के सीजन थे | जाजपुर जिला में | धर्मशाला ब्लॉक के अंतर्गत जेनपुर पंचायत के एरोसंडा ग्राम में सस्मिता महाराणा घूमने के लिए गए थे , जो ब्रम्हाणी नदी के उस पार जो पिताजी के भगवान्भागतपुर ग्राम को | साथ में उनके दो बच्चे लड़की स्नेहाश्री और बेटा मृतुन्जय | बहुत खुसी में दिन सभी चला जाता था | 

मई के महीना, 5 तारीख , शुक्रबार के दिन वो दो संतान को लेके पिताजी के घर से अप्पने ससुराल के गाओं जा रहे थे , और दिन को ढलते हुए 4 बजे थे , जाके नदी के घाट में पहुंचे | उसी समाये रेंगाली दयाम से हठात निकल आया बहुत जोर से पानी ही पानी, और पुर्त बिभाग के जो रास्ता बने थे वो सभी धो गया |  और उसी माँ और बच्चे उस पार  से इस पार आने के लिए होस उड़ गए | उसी समाये इधर सूरज डूबने की बजहसे और थोड़े जात्री  उनके होस उड़ गई | ऐसी परिस्तिति में सस्मिता बापस उसके पिताजी के घर जाने को सोची | फिर भी जेनपुर किनारे लगा हुआ बोट जात्री को उस पर जाने के लिए रखा गया , और उसी बोट में दो बच्चे को लेके सस्मिता बैठ  गयी | समय 5 बजकर 30 मिनिट हुआ था | 25 जात्री को  लेके बोट निकलने लगा, हठात नदी के बीचो बिच और पानी के स्रोत बढ़ने लगा , जो उसे बोट डगमगाने लगा, डर के मरे सभी ने भगवान  बुलाने लगे, हेले भगवान  उनकी पुकार सुन ने से पहले बोट डूबने लगा, और लास्ट में दुब गयी | 


पानी के बहार जोर थी, फिरिबी नदी में पानी गेहेराई कम थी, ऐसी परिस्तिति में नदी के आस पास जो लोग खड़े थे सभी हेल्प करने के लिए दौड़ आये |  बाद में उमर आदमी को बहुत मुश्किल से निकल लिए | 

लेकिन सस्मिता के दो बच्चे के साथ हरप्रिया महाराणा नामके 7 साल के लड़की पानी में बाह गयी |   MAA के आंख के सामने बच्चेको  डूबने  देखती माँ को कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करू | वो भी पानी में थेहेरते थेहेरते दोने बच्चे को उठा लिया और उसी समाये एक माँ के नजर पड़ी उसी हरप्रिया पर जो 7 साल का था, पानी के स्रोत प्रखर होने के बाबजूद वो दोनों बच्चे के साथ उसी बच्चे के हाथ पकडे थे बचाने के लिए बहुत मुश्किल से| 

फिर कुछ देर में हाथ फिसल गया | हरप्रिया निगल गयी और दुब गयी | बादमे दोनों बच्चे को लेके पानी से बहार किनारे पहंची | उसको नहीं बच्चा पाने की बहुत दुःख हुआ सस्मिता को | 

ये घटना याद आने से सस्मिता के रोम रोम खड़ा हो जाता हे | भगवन कृपा से वो दोनों बच्चे को  बचानेके  असेस धन्यवाद मिलता हे |

सस्मिता कहता हैं | उसी दिन के घटना याद आने से बहुत दुःख पहुँज ता हे | नदी को देखने से बहुत डर लगता हे , उसी दिन से मेरे ह्रदय हरप्रिया के याद में रोटा हे | भगवान बोलता हुईं केहि किसी ऐसी बिपदा न आये | 

उसके लिए ऐसे महा बिपदा  रेंगाली द्याम के अधिकारी ओंको दोसी थेराय गया था की बिना सूचित किये हुए पानी छोड़ दी से | 

२.  dost kal mein aur ek topic leke ata huin.



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