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परी और डायन की दोस्ती

परी और डायन की दोस्ती
बहुत समय पहले की बात है, रश्मि नाम की एक परी परीलोक में रहती थी, उसी परीलोक के पास एक डायन नगरी थी जहां बहुत सारी भयानक डायन रहा करती थीं, उन डायनों में सबसे छोटी डायन बिजली बहुत समझदार थी, एक दिन की बात है डायनों और परियों में बहूत भयानक लड़ाई हुई। और उस लड़ाई में परियों  और डायनों को बहुत चोटें आयी। परियों और डायनों में सदियों से दुश्मनी चली आ रही थी, लेकिन अब ये दुश्मनी और भी भयानक रुप लेने जा रही थीं। और बिजली इस बात से बहुत दुखी रहती थी।

एक दिन रश्मि परीलोक से बाहर आकर घूम रही थी, वह एक नदी के पास पहुंची जो बादलों से होकर गुज़रती थी। वहां का नज़ारा बहुत सुंदर था। रश्मि को बहुत अच्छा लग रहा था, वो वहां की खूबसूरती में इतना खो गई कि उसे पता ही नहीं चला की कब उसका पैर नदी में चला गया और वो डूबने लगी। रश्मि चिल्लाने लगी।

रश्मि- बचाओ-बचाओ, कोई बचाओ मुझे, मैं डूब रहीं हूॅं। कोई मेरी मदद करो।

तभी वहां से बिजली गुज़र रही थी, उसने किसी के चिल्लाने कि आवाज़ सुनी तो वो वहां पहुंच गई। उसने जैसे ही वहां परी को देखा तो उसने उसकी मदद करने से अपना मन बदल लिया। उसका मानना  था की सारी पारियां गलत होती है उन्हें बस लड़ाई ही आती है और वो बस हम डायनों के साथ लड़ती ही रहती है। ये सोचकर बिजली वहां से जाने लगी। पर थोड़ी दूर जाते ही उसे रश्मि की हालत पर तरस आ गया और उसने उसकी मदद करने की सोची। जिसके बाद बिजली वापिस नदी के पास के पहुंची और अपने जादू से एक रस्सी मंगाई और सीधे रश्मि की मदद करने के लिए उसे नदी में फेंक दी।

बिजली-  ये लो रस्सी जल्दी से पकड़ लो।


बिजली कि बात सुनकर रश्मि ने जल्दी से वो रस्सी पकड़ ली, और रस्सी के सहारे नदी से बाहर निकल आई। रश्मि ने बिजली को धन्यवाद किया साथ ही उसे उसकी दोस्त बनने का प्रस्ताव भी दिया। लेकिन बिजली ने रश्मि की दोस्ती ये कहकर ठुकरा दी की परियां  डायनों को बेवजह ही मारती रहती है मैं ऐसे लोगों के साथ दोस्ती नहीं करना चाहती जिसके बाद वो वहाँ से जाने लगी। जिसपर रश्मि ने उसे रोकते हुए कहा।


रश्मि- तुम जाना चाहती हो तो चली जाओ लेकिन में रोज़ इसी समय तुम्हारा और तुम्हारी दोस्ती का यहां इंतज़ार करुंगी तुम्हें यकीन हो जाए तो आ जाना।

रश्मि की बात सुनकर बिजली वहां से चली गई, जब बिजली वहां से जा रही थी तो बिजली को रश्मि की बातों में सच्चाई लग रही थी। अब उस दिन के बाद रश्मि रोज़ उस नदी पर आती और बिजली का इंतज़ार करती। लेकिन बिजली कभी भी वहां नहीं आती थी। रश्मि को रोज़ नदी के पास जाता देख उसकी माँ ने उसे वहां जाने का कारण पूछा।

जिसपर रश्मि ने ये कहा की वो किसी का वहां इंतज़ार करती है और वो किसका इंतज़ार करती हैं ये बात वो उन्हें अभी नहीं बता सकती। जिसपर उसकी माँ ने रश्मि से और कुछ नहीं पूछा।

जिसके बाद रश्मि वहां से चली गई और सीधा उसी नदी के पास पहुंची जहाँ वो रोज़ बिजली का इंतज़ार करती थी। रश्मि अपने आप से कहने लगी।

रश्मि- काश, बिजली मेरी दोस्ती को समझ पाती

तभी वहां अचानक बिजली आ गई और उसने रश्मि की दोस्ती को स्वीकार कर लिया। जिसपर रश्मि बहुत ही खुश हुई। जिसके बाद दोनों ने परीलोक और दायक नगरी की दुश्मनी  बात करनी शुरू कर दी। दोनों डायन नगरी और परीलोक में दोस्ती करवाने के बारे में सोचने लगी। दोनों ने इन दो लोको में दोस्ती करवाने की सोची और वहां से एक दूसरे को बाय बोलकर चली गईं। ऐसे ही कुछ दिन तक चलता रहा रश्मि और बिजली छिप छिप कर मिलती रहीं लेकिन अचानक परीलोक और डायन नगरी के बीच दोबारा लड़ाई छिड़ गई, परियां और डायन एक दूसरे के खून कि प्यासी बन गईं। उन दोनों का मिलना मुश्किल हो गया। लेकिन फिर भी वो सबसे आंख बचाकर मिलने में कामीयाब रहीं।

दोनों परीलोक और दायक नगरी की दुश्मनी खतम करवाने के लिए सोचने लगी की तभी अचानक रश्मि को एक योजना सूझी और उसने बिजली को सारी बात बताई। फिर दोनों वहां से चली गई। और अपने अपने साथियों के आगे खड़ी होकर बोलीं। दोनों ने अलग अलग जाकर अपने-अपने लोगों को समझना शुरू किया और उन्हें बताया  की परी और डायनों में भी दोस्ती हो सकती है।जिसपर एक डायन  ने बिजली से बोला।

डायन - बिजली ये क्या बकवास कर रही हो, हमारी दुश्मनी उनसे सदियों से है। और अब तुम उनका साथ दे रही हो

बिजली- ये ज़रुरी तो नहीं कि जो गलती हम सदियों से कर रहें हैं वो अब भी जारी रखें। अब समय आ गया है कि हम ये दुश्मनी यहीं खत्म कर दें।

रश्मि और बिजली लगातार अपने अपने साथियों को समझा रहीं थीं पर कोई समझने के लिए तैयार नहीं हो रहा था। उन दोनों की मेहनत बेकार गई और उन दोनों के साथियों में लड़ाई शुरु हो गई। इस लड़ाई में कई परियां और डायनें घायल हो गईं। इस सब से दुखी होकर रश्मि और बिजली ने दायक नगरी और परीलोक छोड़ने का फेसला लिया।

इस तरह दोनों ने अपना-अपना राज्य छोड़ दिया और एक नया राज्य बसा लिया, और ये राज्य उन्होंने वहीं बसाया जहां पर वो पहली बार मिलीं थीं, बादलों के बीच से निकलती हुई नदी। और चारों तरफ सुंदर से पेड़ पौधे। उस राज्य में कई दिनों तक वो दोनों अकेली रहती रहीं लेकिन कुछ समय बाद धीरे धीरे ओर भी परियां और डायनें जो लड़ाई नहीं चाहती थीं। वो भी उनके सुंदर से राज्य में आकर रहनें लगीं। और इस तऱह से परीलोक और डायन नगरी में मात्र कुछ ही परियां और डायन रह गई और उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। तो वो सब मिलकर रश्मि ओर बिजली के पास पहुंची।

डायन- हमें माफ कर दो बिजली, हमने तुम्हारी बात पर भरोसा न करके बहुत बड़ी गलती कि अब हम कभी नहीं लड़ेंगे।

रश्मि की मां- हां रश्मि हमें माफ कर दो अब हम कभी लड़ाई नहीं करेंगे और हमेशा मिलक रहेंगे।

इस तरह डायन और परियां खुशी-खुशी मिलकर रहनें लगीं।

शिक्षा - तो दोस्तों इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है कि अपनी दोस्ती के बल पर दुश्मनों को भी एक कर सकते हैं |

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