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पद्मावती (पद्मिनी) का इतिहास और कहानी, Padmavati, Padmini History, Story Hindi

रानी पद्मावती (पद्मिनी) का इतिहास और कहानी Rani Padmavati, Padmini History (Story) in Hindi

Rani Padmavati, Padmini History, Story in Hindi: राजस्थान के बेहद ही खुबसूरत और शौर्व वाला राज्य है। आज हम आपको रानी पद्मावती (पद्मिनी) के इतिहास के बारे बताऊंगा। ये जानना जरुरी है कि रानी पद्मावती (पद्मिनी) Padmavati, Padmini की वास्तविक कहानी क्या है, और हमें अपने पीढियों को भी रानी पद्मावती (पद्मिनी) के बारे में बतानी चाहिए ताकि उनको अपने इतिहास पर गर्व हो सके।

इतिहास में एक प्रसंग है की

“दोहराता हु सुनो रक्त से लिखी हुई क़ुरबानी,
  जिसके कारण मिटटी भी चन्दन है राजस्थानी।“

ये बहुत ही सुंदर प्रसंग पंडित नरेन्द्र मिश्र जो मेवाड़ राज्य वंस के राज्य कवी और हिंदी के बड़े कवी भी है, उनके दुआरा लिखी गई है। ये पूरी कविता आप नीचे के पैराग्राफ में पढ़ सकते है।

रानी पद्मावती (पद्मिनी) का इतिहास और कहानी Rani Padmavati, Padmini History (Story) in Hindi

रानी पद्मिनी (Padmavati, Padmini) एक बहुत ही सुन्दर और शालीन स्त्री थी जिसका चर्चा पुरे भारत में किया जाता था। पद्मिनी को रानी पद्मावती के नाम से भी जाना जाता है। रानी पद्मावती चित्तौड़ की रानी थी। पद्मिनी 13 वीं -14 वीं सदी की भारतीय रानी थी। रानी पद्मावती के बारे इतिहास में खूब लिखा गया है वो बहुत शक्शाली थी उनकी साहस और बलिदान की गौरव गाथा इतिहास के पन्नो में अमर हो चूका है।

रानी पद्मावती सिंहल द्वीप के राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती की पुत्री थी। रानी पद्मावती का ब्याह चित्तौड़ के रजा रावल रतन सिंह के साथ हुआ था। रानी पद्मावती के खुबसूरत होने के चर्चा पुरे भारत में था।

एक दिन दिल्ली के सुलतान अलाउदीन खिलजी को पता चला की चित्तौड़ की रानी पद्मावती बहुत खूबसूरत है जिसे वो पाना चाहता था। अलाउदीन खिलजी पद्मावती को किसी भी कीमत पर हासिल करने का मन बना चूका था है। उस समय दिल्ली सल्तनत का दबदबा बना हुआ था जिसका फायदा अलाउदीन खिलजी उठाना चाहता था। अलाउदीन खिलजी ने रानी पद्मावती (Padmavati, Padmini) को पाने के लिए चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया था। अलाउदीन खिलजी ने चितौडगढ़ के किले को कई महीनों तक घेर कर रखा था लेकिन वह पूरी तरह से असफ़ल रहा।

असफ़ल होने के बाद अलाउदीन खिलजी को कुछ हाथ नही लगा तो उसने कूटनीति तरीके से काम लेते हुआ रावल रतन सिंह के पास एक सन्देश भेजवा दिया की हम तो आपसे मित्रता करना चाहते और रानी पद्मावती के खूबसूरती के बारे में बहुत सुना है इसलिए मुख देखना मेरी इच्छा है। हम उनसे मिलने के बाद दिल्ली वापस लौट जायेंगे।



यह सुनते ही राजा रावल रतन सिंह ने ये सन्देश सुना तो क्रोधित हो उठे और उसने यह शर्त मानने से माना कर दिया लेकिन बाद में रानी पद्मावती ने राजा को बहुत समझाते हुए कहा मेरी खातिर बे वजय चितौड़ के सेनिकों का रक्त बहाना चालाकी नहीं है। इसीलिये राजा ने अपनी पत्नी को अलाउद्दीन से मिलने की आज्ञा भी दे दी थी। लेकिन रानी पद्मावती का एक शर्त था की अलाउद्दीन को उनके प्रतिबिम्ब को आईने में देखने की मंजूरी दिया गया था।

जब अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मावती (Padmavati, Padmini) को आईने के दुआरा देखने के बाद अपने मन में रानी को पाने के लिए साजिस रचने लगा। रजा रतन सिंह मेहमान नवाजी के लिए जाने जाते थे इसलिए अपने यहाँ मेहमान बन कर आये कपटी अलाउद्दीन खिलजी को घर से बहार छोड़ने के विदा करने के लिए साथ आये। इस मौके का फायदा उठाते हुए खिलजी ने छल से राजा को बंदी बना लिया।

रानी पद्मावती (Padmavati, Padmini) को सन्देश दिया गया की वो रतन सिंह को तभी मुक्त करेगा जब रानी पद्मावती अपने आप को हमारे हवाले कर दे। यह सन्देश सुनकर रानी पद्मिनी बहुत चिंतित हो गई थी और सोचने लगी थी अब क्या किया जाये। रावल रतन सिंह के सेनापति और महयोधा गोरा थे जिसे रतन सिंह किसी विवाद से उनको बहार कर दिया था। गोरा महल से बहार निकल कर पास के जंगल में रहने लगे थे।

रानी पद्मावती ने निश्चय किया की वो सेनापति गोरा से मिलेंगी और अपने राजा को अलाउद्दीन खिलजी के बंधन से मुक्ति दिलाने की आग्रह करेंगी।

रानी पद्मावती ने जब गोरा से मिली Rani Padmavati Meet Senapati Gora

रानी पद्मावती (Rani Padmavati, Padmini) का पालकी सेनापति से मिलने निकल पड़ी बहुत खोजबीन के बाद रानी का मुलाकर गोरा से हुआ। पद्मावती सेनापति से गोरा को सारी बात बताई और रतन सिंह को मुक्ति दिलाने का आग्रह किया, पूरी बात सुनकर सेनापति गोरा का खून खौल उठा और रानी से कहा की आगे रणनीती बनाई जाये। गोरा ने कहा की रानी जी आप खिलजी को संदेश भेजवाए की रानी पद्मावती अपनी 700 रानियों के साथ खिलजी से मिलने आ रही है है। अलाउद्दीन खिलजी को जब ये सन्देश मिला तो बहुत खुश हुआ और बोला की हम उनका स्वागत करें।गे।



इधर गोरा ने 700 डोली तैयार करवाया और सारे डोली में एक-एक महारथी को बैठा दिया गया और एक डोली को उठाने के लिए चार लोग और तैयार किये गये। ऐसे 700 डोलियों के साथ काफिला निकल पड़ा और और खिलजी के टेंट (जहा पर खिलजी रुका हुआ था) पहुच गया।

गोरा ने खिलजी से कहा की रानी पद्मावती (Rani Padmavati, Padmini) एक बार अपने पति से मिलना चाहती है यह सुनकर खिलजी से अपने सेनापति से कहा की इनको रजा से मिलने दिया जाये। जब रजा से मिलने गोरा पहुचा तो रजा गोरा के गले लग कर रोने लगे तभी गोरा ने कहा कि ये रोने का वक्त नही है हम आपको रिहा कराने आये है। गोरा के सरे सैनिक पहले तैयार थे जो डोली के साथ आये उनसे कहा गया की एक दुकड़ी राजा को सुरक्षित लेकर किला की तरफ निकलेगी और बाकि लोग हमला बोल देंगे। गोरा जनता था की खिलजी सेना के सामने वो बहुत देर तक नही रोक सकता फिर हिम्मत कहा हारने वाला था। एक दुकड़ी राजा को लेकर निकल और गोरा और उसका भंजा बादल ने हमला कर दिया। गोरा और बदल ने जमकर लड़ाई लड़ी और अपनी नमक का हक़ अदा किया और अंत में खिलजी का सेनापति से गोरा को छल से सर काट दिया।

सर काटने के बाद भी गोरा का धढ़ कुछ देर तक लड़ते रहा है और अंत में गोरा और बादल वीरगति को प्राप्त हो गये। जिसके के लिए भारत माता नही भी आसू बहाई थी ऐसे वीर सपूतो के लिए Zuban के तरफ से सलाम करता है ।

रजा रतन सिंह सुरक्षित अपने महल पहुच चुके थे।

अपने इस हार को देखकर खिलजी बहुत शर्मिंदा हुआ और उसने इस धोखे का बदला लेने का निश्चय किया। उसने तुरंत ही चितौड़गढ़ किले पर आक्रमण कर दिया खिलजी के सेनिकों ने चितौड़गढ़ किले को नही भेद पाए।

खिलजी ने आदेश दिया की किले को चारों तरफ़ से घेर लिया जाये। किला को घेरते देखर राजा रतन सिंह ने अपने बहादुर सेनिकों को आदेश दिया की सभी द्वार खोलकर खिलजी की सेना से बहादुरी से सामना करे।

किले का दुवार खुला देख कर रानी पद्मिनी ने चितौड़ की सभी महिलाओं के साथ निश्चय किया दुश्मन सेना से डटकर लड़ा जाये और दुस्मानो के हाथ लगने से अच्छा है की बहादुरी से लड़कर वीरगति को प्राप्त हुआ जाये।

रानी ने महल के अंदर एक विसाल चिता तैयार करवाया और सोलह हजार स्त्रियों के साथ जौहर क्र लिया।

रानी पद्मावती (पद्मिनी) का जौहर Rani Padmavati (Padmini) Jauhar

Rani Padmavati (Padmini) Jauhar


यह खबर सुनकर सैनिको से खिलजी के सेना पर टूट पड़े और लड़ते लड़ते शहीद हो गये है। अंत में राजा रतन सिंह भी युद्ध में शहीद हो गए थे इस प्रकार रानी पद्मिनी (Padmavati, Padmini) के जौहर की जीत हुई जिन्होंने अपने गौरव की रक्षा के लिए और दुश्मनों के सामने सिर झुकाने की सिवाय जौहर की जवालाओं में ख़ुद को सौंप कर अपने आत्म सम्मान की रक्षा की, रानी पद्मिनी के जीवन को आज राजस्थान में पढ़ाया जाता है, गौरव बताया जाता है और देश दुनिया से आने वाले पर्यटकों को चित्तौड़गढ़ के किले में वह स्थान दिखाए।

कुमार विश्वास ने बताया रानी पद्मिनी का इतिहास, देखें Kumar Viswas Said Story of Rani Padmavati, Padmini

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