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जंग-ऐ-आज़ादी यादगार भवन


जंग-ऐ-आज़ादी यादगार भवन,
करतारपुर (जालंधर), पंजाब 
जंग-ऐ-आज़ादी यादगार भवन, करतारपुर (जालंधर), पंजाब के जीटी रोड पर स्थित है। मुझे जब भी कपूरथला से चंडीगढ़ या जालंधर कैंट जाना होता है तो मैं  करतारपुर से होकर आना-जाना पसंद करता हूँ क्योंकि इससे मैं जालंधर शहर के कई चौराहे पर लगे ट्रैफिक लाईट से बच जाता हूँ और इसी कारण आते-जाते इस जंग-ऐ-आज़ादी यादगार भवन-समूह के नयनाभिराम निर्माण की प्रक्रिया को देखता आया हूँ। 19 अक्टूबर 2014 को इसका नींव पत्थर रखा गया था और इसका निर्माण कार्य 26 मार्च 2015 को शुरू हुआ था। 6 नवम्बर 2016 को जंग-ए-आज़ादी मेमोरियल को राष्ट्र को समर्पित किया गया। ऐसे तो इसका निर्माण कार्य अभी भी चल रहा है।   जंग-ऐ-आज़ादी यादगार भवन, वाहनों की पार्किंग के लिए लगभग 5 एकड़ भूमि के साथ 25 एकड़ में फैली हुई है एवं इसका अनुमानित लागत 200 करोड़ रूपए है।

जंग-ऐ-आज़ादी यादगार भवन-समूह का वास्तु-शिल्प अद्भुत है और आप इसे घंटो तक निहार सकते है।  इसमें दो बड़े  ( 43.08 मीटर ऊँचा ) एवं छः छोटे चार पत्तियों युक्त अधखिले कमल के फूल जैसा भवन ( कोटा संगमरमर एवं सैंड स्टोन से निर्मित ) और एक 45.5 मीटर ऊँचा शहीद-ऐ -मीनार के अलावा एक ऑडिटोरियम, 150-सीट वाला मूवी हॉल, 1000 सीट वाला ओपन-एयर थिएटर, 500-सीट वाला एम्फीथिएटर (रंगभूमि), लाइब्रेरी, रिसर्च और सेमिनार हॉल है।


जंग-ऐ-आज़ादी यादगार भवन-समूह मूलतः स्वतंत्रता संग्राम में पंजाब के शहीदों की भूमिका को एक नया आयाम देकर उनकी यादों को जन-जन तक साझा  करने का कार्य करती है। महाराजा रणजीत सिंह जी से लेकर भारत की आज़ादी तक अंग्रेजो से लोहा लेते पंजाब के जाबांज स्वतंत्रता सेनानी की सजीव चित्रण करने में यह यादगार भवन सक्षम है।  आप जब यहाँ आएंगे तो आप उस दौर के घटनाओं को अपने सामने घटित होता महसूस करेंगे।

अभी यहाँ एक संग्रहालय, एक मूवी हॉल जिस में चार शो होते है और सायं 7 बजे से एक लेज़र शो होता है।  यह सुबह 9 बजे से रात्रि 8 : 45 तक प्रत्येक दिन खुला रहता है। अगर आप जालंधर के आस-पास रहते हैं तो यहाँ पर आने का उपयुक्त समय दोपहर 2 :30 बजे से 3 : 00 बजे तक है।  

जंग-ऐ-आज़ादी यादगार भवन-समूह में अभी तक प्रवेश एवं पार्किंग निः शुल्क है। 


















-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"



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